(भैरव लाल दास) 2000 के विधानसभा चुनाव में यही कयास लगाए जा रहे थे कि लालू प्रसाद की राजद धराशायी हो जाएगी। लेकिन 324 सीटों में से 293 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली राजद ने सबसे अधिक 28.34% वोट और 124 सीट हासिल कर ली। विधानसभा की कुछ 42% सीट पर राजद ने कब्जा जमा लिया। 79 सीटों पर राजद तीसरे स्थान पर आई थी। इस चुनाव में राजद को 78% यादव, 55% मुसलमान, 32% दलित, और 40% अन्य पिछड़ा वर्ग का समर्थन मिला था। चुनाव में राजद को गठबंधन कम्युनिस्ट के साथ था।
अपनी समर्थक जातियों के दबंग और अपराधियों को खुलेआम संरक्षण देने का लाभ भी राजद को मिल रहा था। अपनी समर्थक जातियों के दबंग और अपराधियों को खुलेआम संरक्षण देने का लाभ भी राजद को मिल रहा था।अब तक लालू प्रसाद उच्च जातियों के पारंपरिक सामाजिक और राजनीतिक वर्चस्व को ही नहीं, अपितु नौकरशाही के शान-ओ-शौकत को भी धूल चटा चुके थे। पिछड़ों, दलितों और मुसलमान अधिकारियों को महिमामंडित कर वे अलग संदेश दे रहे थे।
राज्यपाल ने दिया नीतीश को सरकार बनाने का मौका
2000 के विधानसभा चुनाव का परिणाम 26 फरवरी को आया। राजद को 124, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को 121 और कांग्रेस को 23 सीटें आईं। राज्यपाल वीसी पाण्डेय ने नीतीश कुमार को सरकार बनाने का आमंत्रण दिया, जिन्हें 151 विधायकों का समर्थन प्राप्त था। उधर, विरोधी राजद एवं कांग्रेस गठबंधन 159 विधायकों के समर्थन का दावा जता रही थी। 3 मार्च, 2000 को नीतीश कुमार की सरकार ने शपथ लिया। उधर, लालू दिल्ली चले गए और राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की गुहार लगाने लगे। राजद ने बिहार बंद का एलान भी किया।
विधायकों के समर्थन के लिए शह-मात के खेल में व्यस्त रहे सभी राजनीतिक दल
बिहार में विधायकों का समर्थन प्राप्त करने को लेकर सभी पार्टियां शह-मात के खेल में व्यस्त हो गईं। सभी पार्टियों के समक्ष जीत ही लक्ष्य था। लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार होने से बचाने का जिम्मा लेने को कोई तैयार नहीं था। कांग्रेस के 6 विधायकों को लेकर राजद दिल्ली चली गई। राजग नेता चाहते थे कि दिल्ली में इन विधायकों की मुलाकात रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडिस और गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी से करवाई जाए। लेकिन जैसे ही विधायक दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरे, इन विधायकों को इंटक नेता राजेन्द्र सिंह के साथ राजद के प्रेम गुप्ता अपनी गाड़ी में बैठाकर ले उड़े।
एक-एक विधायक पर लालू प्रसाद की नजर थी। बीएसपी के सुरेश पासी, पटना के अस्पताल में पड़े हुए थे। नीतीश कुमार और केंद्रीय संचार मंत्री रामविलास पासवान ने वहां जाकर उनसे मिलना चाहा। जब वे पहुंचे तो देखा कि लालू प्रसाद वहां पहले से उपस्थित हैं। निर्दलीय पप्पू यादव कांग्रेस विधायकों से मिलने के लिए होटल पाटलिपुत्र अशोक पहुंचे तो देखा कि उधर से लालू प्रसाद आ रहे हैं। आमने-सामने की मुलाकात टालने के लिए पप्पू वाशरूम में घुस गए। -क्रमश:
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