जिले में कोरोना के बढ़ते केस को देखते हुए अब मुंबई के धारावी के मॉडल पर काम होगा। कंटेनमेंट जोन के सभी घरों में लोगों की स्क्रीनिंग हाेगी। रैपिड एंटीजन किट से जांच हाेगी। इसमें रिपाेर्ट निगेटिव आई तो आरटीपीसीआर मशीन से जांच होगी। इसमें जिले की 2285 आशा, हेल्थ वर्कर सर्वे करेंगे। स्वास्थ्य विभाग के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने इसके निर्देश दिए हैं। धारावी मॉडल व भागलपुर में हो रही तैयारियों पर त्रिपुरारि की रिपोर्ट...।
1 ये हैं निर्देश
कंटेनमेंट जाेन में संक्रमितों के संपर्क में रहनेवाले व आसपास के सभी लाेगाें की स्क्रीनिंग होगी। जरूरत पर रैपिड एंटीजन किट व आरटीपीसीआर मशीन से जांच कराएं।
2 गर्भवती, महिलाएं, वृद्ध व गंभीर मरीजों की सूची बना आशा-हेल्थ वर्कर से उनके सेहत की निगरानी करें। ऑक्सीजन लेवल नियमित मापें। तुरंत उनका इलाज करें।
भागलपुर में ये है तैयारी | जिले के 30 लाख आबादी तक 2285 आशा कार्यकर्ताओं को घर-घर भेजकर लोगों की स्क्रीनिंग कराएंगे। पल्स पाेलियाें के 3 हजार हेल्थ वर्कर की भी मदद लेंगे।
तैयारी है पर चुनौतियां कम नहीं
जिले के सरकारी अस्पतालाें में ही मात्र 50 डाॅक्टर ही हैं। इनमें आधा दर्जन संक्रमित होने पर होम आइसाेलेशन में हैं। मायागंज के डॉक्टर अन्य इलाकों में जांच नहीं करते और निजी डॉक्टरों ने पहले ही क्लीनिक में इलाज कम कर दिया है।
निजी डॉक्टरों से वॉलिंट्री सेवा लेना मुश्किल है। डाॅक्टराें के निजी क्लीनिक नगर निगम सैनिटाइज कर सकता है पर मॉनिटरिंग सिस्टम न होने से इसे जमीन पर पूरी तरह उतारना भी बड़ी चुनौती होगी।
कंटेनमेंट जोन में पूरी तरह लॉकडाउन होने पर 8-10 दिनों तक भोजन-पानी की व्यवस्था जिला प्रशासन को करना होगा। इसके लिए भी प्रशासन को सरकार की अनुमति की दरकार होगी।
डाेर-टू-डाेर जांच के लिए माेबाइल वैन में जांच के सभी उपकरण रखने होंगे। निजी वाहन इसके लिए जाते। ऐसे में एम्बुलेंस में ही यह हो सकता है, लेकिन जिले में पहले से ही कम महज 24 एम्बुलेंस है।
ट्रेसिंग | डॉक्टरों व निजी क्लिनिकों के सहयोग से 50 हजार से ज्यादा घरों में लोगों की जांच की। मोबाइल वैन में भी स्क्रीनिंग की।
ट्रीटमेंट | स्लम में ही इलाज की व्यवस्था की। 24 घंटे सात दिन तक भोजन दिया। सिर्फ गंभीर मरीजों को ही बाहर भेजा और 90 % मरीजों का इलाज वहीं किया गया।
ट्रैकिंग | 3.60 लाख से ज्यादा स्क्रीनिंग की। 8246 बुजुर्गों का भी सर्वे हुआ।
टेस्टिंग | 13500 लोगों के टेस्ट हुए। क्वारेंटाइन करने के साथ 7 दिनों तक भोजन भी दिया।
नगर निगम ने ऐसे काम किया
हाई रिस्क जोन में खूब जांच की। संदिग्धों की पहचान के लिए फीवर कैंप लगाए।
डॉक्टरों की कमी हुई पर 24 निजी डॉक्टर साथ आए। उन्हें बीएमसी ने सारी सुविधाएं दीं। डॉक्टर घर-घर पहुंचे और लोगों की जांच की। संदिग्धों की पहचान हुई।
सभी डॉक्टरों से क्लीनिक खुलवाए। उनके यहां आए संदिग्धों की जानकारी ली।
बीएमसी ने सभी क्लीनिक सैनिटाइज किए। पीपीई किट, ग्लब्स समेत जरूरी चीजें दी।
सरकार का निर्देश आया है। इसके अनुसार, कंटेनमेंट जाेन में रहने वाले सभी लाेगाें की स्क्रीनिंग होगी। ऑक्सीजन लेवल भी वृद्ध व गंभीर मरीजाें का मापा जाएगा। जरूरत पर तुरंत इलाज के लिए अस्पताल भेजा जाएगा। यह प्लान जल्द लागूू होगा। -डाॅ. विजय कुमार सिंह, सीएस
जाे भी कंटेनमेंट जाेन बनेगा, वहां सैनिटाइजेशन होगा। जहां पहले से घाेषित हैं, वहां भी सफाई कराई जा रही है। निगम से क्वारेंटाइन करने या भाेजन देने की व्यवस्था नहीं है। निजी डाॅक्टराें से ताे सेवा के लिए स्वास्थ्य विभाग ही बात कर सकता है। -सत्येंद्र प्रसाद वर्मा, पीआरओ,निगम
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