शिकागो विवि के एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के सीनियर एसोसिएट डायरेक्टर आशीर्वाद राहा ने कहा कि लॉकडाउन में सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों पर रोक के कारण शहर के वायु प्रदूषण के स्तर में कमी आई है। लेकिन यह स्थिति अस्थाई है। हवा की स्वच्छता के इस स्तर को बनाए रखने के लिए सरकार को नीतियों को परिवर्तन करना होगा। साफ हवा से नागरिकों के जीवन में प्रत्याशा में वृद्धि हो सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार बिहार में वायु प्रदूषण के कारण लोगों की औसत उम्र 8.42 साल कम हो रही है। राहा ने उदाहरण देते हुए कहा कि चीन अपना प्रदूषण विरोधी युद्ध जीत रहा है। वर्ष 2013 से विश्व में कणीय प्रदूषण में हुई करीब तीन-चौथाई कमी का कारण चीन है। जिसने प्रदूषण में कमी के लिए आक्रामक अभियान चलाया है। अगर इस कमी को टिकाए रखा जाता है, तो चीन के नागरिकों की औसत आयू में 2 वर्ष की वृद्धि हो जाएगी।
अच्छी बात : पिछले चार माह में 100 से नीचे रहा एक्यूआई लेवल
लॉकडाउन की वजह से पटना का एक्यूआई लेवल 0-50 और 51-100 के बीच रहा है। यानी लॉक डाउन के दौरान एक्यूआई लेवल 100 से ऊपर नहीं गया है। अगस्त की बात करे बुधवार को पटना के एक्यूआई लेवल 44 है जबकि गुरूवार को 49 रहा है। अप्रैल माह में एक्यूआई लेवल 50 से 100 के बीच रहा है। वहीं मई, जून, जुलाई और अगस्त में अधिकांश दिन एक्यूआई लेवल 50 से नीचे रहा है। वायु प्रदूषण से बीपी और अस्थमा जैसी बीमारियों का खतरा
कण प्रदूषण में पीएम 2.5 और पीएम 10 शामिल हैं, जो बहुत खतरनाक होते हैं। पर्टिकुलेट मैटर विभिन्न आकारों के होते हैं और ये मानव और प्राकृतिक दोनों स्रोतों के कारण से हो सकते हैं। स्रोत प्राइमरी और सेकेंडरी हो सकते हैं। प्राइमरी स्रोत में ऑटोमोबाइल उत्सर्जन, धूल और खाना पकाने का धुआं शामिल हैं। प्रदूषण का सेकेंडरी स्रोत सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे रसायनों की उपस्थिति है।
ये कण हवा में घुल जाते हैं और इसको प्रदूषित करते हैं। इनके अलावा, जंगल की आग, लकड़ी के जलने वाले स्टोव, उद्योग का धुआं, निर्माण कार्यों से उत्पन्न धूल वायु प्रदूषण आदि और स्रोत हैं। ये कण फेफड़ों में पहुंच कर खांसी और अस्थमा का कारण बनते हैं। इसके साथ ही रक्तचाप, दिल का दौरा, स्ट्रोक और भी कई गंभीर बीमारियों का खतरा बन जाता है।
गाड़ियों के परिचालन व भवन निर्माण के लिए सरकार को तय करने होंगे कड़े मानक
पहल के चिकित्सा निदेशक एवं वरिष्ठ फिजीशियन डॉक्टर दिवाकर तेजस्वी ने बताया कि राजधानी वासियों को इसी तरह शुद्ध हवा सालों-साल मिलती रही तो लोगों की जीवन प्रत्याशा में निश्चित वृद्धि होगी। बशर्ते की इसके लिए सरकार को गाड़ियों की परिचालन, भवन निर्माण और ईट-भट्ठा के लिए मानक तय करना होगा। और राजधानी में संजय गांधी जैविक उद्यान की तरह दो-तीन और उद्यान होना चाहिए। इससे राजधानी में हरियाली क्षेत्र बढ़ेगा।
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