जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज से पटना के लिए रेफर किए गए एक गंभीर मरीज की मात्र 35 किलोमीटर के बाद ऑक्सीजन समाप्त होने के कारण त्रिवेणीगंज में मौत हो गई। जबकि मरीज को लगभग पौने तीन सौ किलोमीटर की यात्रा करनी थी। घटना के बाद एंबुलेंस के दोनों चालक फरार हो गए। इस कारण से त्रिवेणीगंज में चार घंटे तक शव एंबुलेंस में ही पड़ा रहा। मृतक की पहचान अररिया जिले के नरपतगंज के मधुरा दक्षिणी पंचायत के वार्ड संख्या-चार निवासी बलदेव लाल देव के रूप में की गई। मृतक के पोता आयुष देव ने बताया कि उनके 85 वर्षीय दादा को 29 जुलाई को कोरोना संक्रमित बताए गए थे। वे मधुमेह के मरीज थे। उन्हें फारबिसगंज आइसोलेशन सेंटर में भर्ती कराया गया। लेकिन वहां कहा गया कि मरीज को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है, इसलिए उन्हें मधेपुरा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। दो अगस्त को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। इस बीच 6 और 7 अगस्त को उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई। शनिवार को तबीयत ज्यादा खराब हो गई। इसके बाद उन्हें पटना के लिए रेफर कर दिया गया। मेडिकल कॉलेज के एंबुलेंस के ड्राइवर ने कहा कि ऑक्सीजन का बड़ा वाला सिलेंडर है, 12 घंटा तो चलेगा। सुबह लगभग 9 बजे वे लोग दादा को लेकर एंबुलेंस से त्रिवेणीगंज, जदिया होते हुए फोरलेन के रास्ते पटना जा रहे थे। इस बीच त्रिवेणीगंज दुर्गास्थान पहुंचकर वे लोग अपने एक अटेंडेंट को लेने लगे। तभी ड्राइवर ने कहा कि ऑक्सीजन समाप्त हो गया है। फिर वे लोग मरीज को लेकर त्रिवेणीगंज के अनुमंडलीय अस्पताल गए, लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही मरीज की मौत हो चुकी थी। इस बात की भनक लगते ही एंबुलेंस के दोनों ड्राइवर फरार हो गए।
वेंटिलेटर रहते नहीं मिली सुविधा
पाेता आयुष ने बताया कि दादा की स्थिति गुरुवार की देर रात को काफी खराब हाे गई थी। इसके बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। लेकिन बमुश्किल से 15 मिनट के बाद बिजली का बोर्ड खराब हो गया। इसके बाद वेंटिलेटर ने काम करना बंद कर दिया। जिम्मेदार लोगों को फोन करते रह गए, लेकिन कोई नहीं आया। जुगाड़ लगाकर उन्हें सीधे ऑक्सीजन दिलाकर सुबह तक काम चलाया।
रास्ते में समाप्त हो गया ऑक्सीजन
रास्ते में एंबुलेंस में ऑक्सीजन समाप्त हो गया था। इसके बाद मरीज को यहां ऑक्सीजन के लिए लाया गया था। लेकिन यहां आने पर मरीज मृत था।
प्रभारी उपाधीक्षक, डॉ. आरपी सिन्हा, अनुमंडलीय अस्पताल, त्रिवेणीगंज
उनके परिजन के ऑन रिक्वेस्ट हुए थे डिस्चार्ज
मरीज काे सांस की परेशानी थी। रिपोर्ट निगेटिव आ गई थी। शनिवार को ही उनके परिजन ऑन रिक्वेस्ट डिस्चार्ज करा लिए थे। लेकिन उन्हें वाहन नहीं मिल पाया। वे अपने जुगाड़ पर एंबुलेंस से जा रहे थे। त्रिवेणगंज के आसपास उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई। ऑक्सीजन के लिए अस्पताल ले गए। इसी क्रम में मौत हो गई। यह कहना कि रेफर किया गया था, झूठा आरोप है। कर्नल अहमद अंसारी, अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज
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