(प्रशांत कुमार) राज्य में अंडे की कीमत में लगातार इजाफा हो रहा है। मार्च से अब तक 40 से 50 फीसदी तक अंडा उत्पादन घटने के कारण कीमतों में इजाफे की बात कही जा रही है। फिलहाल अंडे की खुदरा दर 75 रुपए दर्जन और 7 रुपए नग है। एक माह में प्रति कैरेट 40-45 रुपए तक बढ़ी है। अंडे की कीमत बढ़ने के साथ आम लोगों की परेशानी भी बढ़ रही है।
हरी सब्जियों के आसमान छूते दाम के की वजह से अधिकतर लाेग अंडे काे विकल्प के रूप में ले रहे हैं। उत्पादकों की माने तो अभी अंडे की मांग का पीक सीजन आना बाकी है। ठंड बढ़ने के साथ नवंबर से फरवरी तक अंडे की मांग बेतहाशा बढ़ती है।
ऐसे में इस वर्ष सर्दियों में अंडा 10 रुपए प्रति नग तक पहुंच सकता है। क्याेंकि, कीमत बढ़ने का एक प्रमुख कारण जमाखाेरी भी है। अंडे के खुदरा काराेबारियाें के अनुसार बड़े काराेबारी ठंड के अाते माैसम काे देखते हुए भारी मात्रा में जमाखाेरी करने लगे हैं। ये जमाखाेर ही बाजार भाव नियंत्रित करते हैं। राष्ट्रीय स्तर के सप्लायरों की मानें, तो 2021 में अप्रैल-मई में ही कीमतें स्थिर होंगी।
हरियाणा के बरवाला से देश भर में नियंत्रित हाेता है अंडे का भाव
हरियाणा के बरबाला से प्रत्येक दिन दोपहर 12 बजे अंडे की दर जारी होती है। उसी आधार पर बिहार समेत अन्य राज्यों में इसकी कीमत तय होती है। अंडा कारोबारी मुश्ताक आलम व शोएब के अनुसार एक अंडे पर 40 पैसा ट्रांसपोर्टेशन शुल्क जोड़ा जाता है। अगर बरवाला में 5 रुपए प्रति नग दर तय हाे, ताे बिहार में 5 रुपए 40 पैसे हो जाती है।
वजह पूछने पर कहा कि बिहार में अंडा प्रोडक्शन 4-5 वर्षों से बढ़ा है। पहले चूंकि बरवाला से ही अंडे की सप्लाई होती थी, इसलिए आज भी उसी को मानक माना जाता हैा। इधर, बारिश-बाढ़ के कारण काराेबारियाें की कमर पूरी तरह टूट गई है। अब मनमानी दर पर खरीद-बिक्री यहां के काराेबारियाें की मजबूरी है।
सेहत के लिए काफी लाभप्रद
अंडा सेहत के लिए फायदेमंद हाेता है। न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. नवीन कुमार के अनुसार इसका सफेद हिस्सा शुद्ध रूप से प्रोटीन का स्राेत है। दो बड़े अंडों में 12-14 ग्राम प्रोटीन होता है। प्रोटीन शरीर के विकास के लिए अनिवार्य है। यह मांसपेशियों के निर्माण से लेकर टूटी-फूटी कोशिकाओं की मरम्मत में काफी कारगर है।
लाॅकडाउन में कौड़ी के भाव बिकीं मुर्गियां, बारिश ने ताेड़ दी कमर
उत्तर और उत्तर पूर्वी भारत में अंडे के सप्लायर और उत्पादक मुजफ्फरपुर के मो. मुस्तफा ने बताया कि लॉकडाउन के कारण इस वर्ष 50 फीसदी उत्पादन घटा है। लॉकडाउन की शुरुआत में अप्रैल-मई में मुर्गी व अंडे से काेराेना फैलने की गफलत व अफवाह के कारण मुर्गियां काैड़ी के भाव बिकीं। कई जगहाें पर हजाराें-हजार मुर्गियां मार देनी और जिंदा गाड़ देनी पड़ी। व्यवसाय चौपट हो गया। नया सीड नहीं डाला गया। रही-सही कसर जून से सितंबर तक लगातार भारी बारिश और बाढ़ ने पूरी कर दी। उत्पादन बढ़ने के बदले घटता गया।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3lA2UcQ

0 Comments
Please do not enter any spam link in the comment box