(राजेंद्र घोेष) लखीसराय स्टेशन के नवनिर्मित प्लेटफॉर्म के कई हिस्सों में लगातार दरारें पड़ रही हंै। इसे ठीक करने की बजाय दरारों को जल्दबाजी में सीमेंट के घोल से ढंका जा रहा है। बता दें कि निर्माण के साथ ही प्लेटफॉर्म के कई हिस्से में लगातार मोटी दरारें पड़ जा रही हैं। घटिया निर्माण से नवनिर्मित प्लेटफॉर्म के कई हिस्सों में दरारें आई।
18 सितंबर को प्रधानमंत्री के किऊल रेलवे पुल के उद्घाटन पर उसी स्थान पर मंच बनाया गया। कार्यक्रम के चार दिन पहले दानापुर के डीआरएम सुनील कुमार ने लखीसराय स्टेशन का निरीक्षण किया था। नवनिर्मित प्लेटफॉर्म पर जहां खामियां दिखी आनन फानन में ठीक कराया गया। तत्काल प्लेटफॉर्म की दरार को सीमेंट के घोल से भरकर रंग रोगन किया था।

अब फिर से प्लेटफॉर्म पर दरारें दिखने लगी हैं। संवेदक प्लेटफॉर्म के उस हिस्से की ढलाई करा रहे हैं। करीब तीन माह पूर्व ठीक एफओबी के नीचे का हिस्सा धंस गया था। घटिया निर्माण पर लोगों ने लगातार सवाल उठाए। किऊल में भी घटिया निर्माण के चलते जून में पलेटफॉर्म पर बारिश के जमा पानी का सब वे में तेजी से रिसाव हुआ था। फिर उसकी मरम्मत हुई।
घटिया निर्माण की दोनों जगहों पर पोल खुल गई। बता दें कि चार माह पहले ही लखीसराय में नया प्लेटफॉर्म बना है। प्लेटफॉर्म के जिस हिस्से की ढलाई की गई, वहां दरारें पड़ती गई। ठेकेदार द्वारा दरार को भरने का बार बार प्रयास किया जाता रहा। कुछ दिन बाद दरारें फिर से उभरने लगी। लखीसराय के लोगों ने भी रेलवे की घटिया निर्माण पर सवाल उठाया।
दो करोड़ से बना प्लेटफाॅर्म
प्लेटफॉर्म की लंबाई की हिसाब से डेढ़ से दो करोड़ रुपए की राशि खर्च होती है। लखीसराय में तीन नए प्लेटफॉर्म बने हैं। एक पुराने प्लेटफाॅर्म के लगभग 200 फीट को तोड़ नया बनाया गया। हालांकि निर्माण कार्य जारी है। इधर, रेलवे इंजीनियर की मानें तो गुणवत्तापूर्ण कार्य नहीं होने से प्लेटफॉर्म के कुछ हिस्सों में दरारें आ रही हैं।
डीआरएम : कार्यों की गुणवत्ता सर्वोपरि
18 सितंबर को प्रधानमंत्री ने रेलवे के मेगा परियोजना पुल का उद्घाटन किया था। इसकी तैयारी को लेकर डीआरएम आए थे। डीआरएम ने रेलवे के घटिया निर्माण के सवाल पर कहा था कि गुणवत्तापूर्ण कार्य प्राथमिकता है। शिकायत पर कार्रवाई होगी। मौके पर ही लोगों ने कहा कि प्लेटफॉर्म ढहने, धंसने और दरार पड़ने के बाद और कितना प्रमाण चाहिए। कब इस गंभीर अनियमितता पर कार्रवाई होगी।
अंदेखी की गई है
मिट्टी सेटेलमेंट व कांपेक्ट नहीं होने से पक्के निर्माण में दरार एवं धंसने की संभावना रहती है। लूज मिट्टी को पूरा दबाने के लिए रेगुलर रोलर चलाने एवं मिट्टी में पानी डालना था। टाइम सेटेलमेंट भी जरूरी है। निश्चित तौर पर इसकी अनदेखी की गई होगी।
दयानंद मिश्रा, अभियंता निर्माण
दरार वाले हिस्से हो रहे ठीक
प्लेटफॉर्म पर दरार पड़ने के कई कारण हो सकते हैं। इसका मतलब नहीं है कि घटिया निर्माण के चलते ऐसा हुआ है। उन हिस्सों काे संबंधित कांट्रेक्टर ठीक करा रहा है। डिविजन स्तर के अधिकारियों की इस निर्माण कार्य पर लगातार नजर है।
शशांक पांडेय, सहायक मंडल अभियंता प्रोजेक्ट
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