चुनाव में बड़ी संख्या में निर्दलीय भाग्य आजमाते हैं। 2005 के मुकाबले 2010 के बिहार विधानसभा चुनाव में लगभग दोगुने निर्दलीय मैदान में उतरे थे। 2005 में 746 खड़े थे, जबकि 2010 के चुनाव में 1342 ने किस्मत आजमाई थी। 2015 में निर्दलीयों की संख्या 2010 से कम थी, 1150 उम्मीदवार ही चुनाव मैदान में थे।
इस बार के विधानसभा चुनाव में 1301 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। इनमें पहले व दूसरे फेज में सबसे अधिक निर्दलीय उम्मीदवार हैं, दूसरे फेज में 513 प्रत्याशी निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। जबकि पहले फेज में 406 और तीसरे फेज में 382 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।
जीतनेवालों का आंकड़ा एक ही बार दहाई तक पहुंचा
चुनाव में भले बड़ी संख्या में निर्दलीय खड़े हों लेकिन जीतने वालों की संख्या एक ही बार दहाई तक पहुंच पाई है। 2005 के चुनाव में 10 निर्दलीय जीते थे जबकि 2010 में 1342 में से सिर्फ 6 ही जीत पाए थे। 2015 में 1150 में से 4 ने जीत दर्ज की थी। वर्ष 2020 का फैसला 10 नवंबर को होगा।
इस बार कई बागी भी बतौर निर्दलीय मैदान में
वर्ष 2005 से लेकर अब तक पिछले 15 सालों में 3238 उम्मीदवारों ने निर्दलीय चुनाव लड़ा लेकिन इनमें से सिर्फ 20 जीते। वर्ष 2020 के आंकड़ों को मिला दें तो कुल 4539 प्रत्याशी होते हैं जिन्होंने निर्दलीय अपनी किस्मत आजमाई है। हालांकि इस बार कई बागी भी निर्दलीय चुनाव मैदान में हैं।
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