बीटीएमसी सचिव नांजे दोरजे ने कहा कि बाबा साहेब आंबेडकर ने बौद्ध धर्म स्वीकार किया। वे बुद्ध के समरसता के विचार से काफी प्रभावित थे। दलित वर्ग की शिक्षा के बारे में अम्बेडकर का मत था कि दलितों के अत्याचार तथा उत्पीड़न सहन करने तथा वर्तमान परिस्थितियों को संतोषपूर्ण मानकर स्वीकार करने की प्रवृति का अन्त करने के लिए उनमें शिक्षा का प्रसार आवश्यक है। श्री दोरजे ने डा आंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर जयप्रकाश उद्यान में उनकी मूर्ति पर फूल अर्पित की।
उनके अलावा बीटीएमसी के मुख्य भिक्षु चालिंदा, भिक्षु डा मनोज, भिक्षु दीनानंद सहित अन्य मौजूद थे। डा मनोज ने कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही उन्हें इस बात का आभास होगा कि विश्व कितना प्रगतिशील है तथा वे कितने पिछड़े हुए है। उनका मानना था कि दलितों को अन्याय, अपमान तथा दबाव को सहन करने के लिए मजबूर किया जाता है। लाॅक डाउन के कारण बाबा साहेब की जयंती की औपचारिकता पूरी की गई।
आंबेडकर ने जाति को नहीं कर्म को महान बताया है। उन्होंने खुद अपने कर्म के आधार पर न सिर्फ समाज में बल्कि देश की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया। आंबेडकर ने यह स्पष्ट करने का प्रयास किया कि जाति-व्यवस्था भारतीय समाज की एक बहुत बड़ी विकृति है। जाति व्यवस्था के कारण लोगों में एकता की भावना का अभाव है।
आंबेडकर के विचारों पर करें अमल
संविधान निर्माता डॉ भीमराव अंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर प्रखंड में कई जगहों पर कार्यक्रम कर श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर डुमरिया अंबेडकर चैक पर कार्यक्रम आयोजित की गई। उपस्थित लोगों ने उनके विचारधारा को अमल करने की बात कही। इसके अलावा नारायणपुर के चोंहा गांव में डॉ अम्बेडकर को याद किया गया। इस अवसर पर पूर्व मुखिया राजदेव यादव, राजद नेता नौशाद खां, साजिद अहमद बागी, रविंद्र रवि, असलम खां, प्रमोद दास, रिंकु रविदास सहित कई लोग मौजूद थे।
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