वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर जिले के सभी प्रारंभिक सरकारी व निजी स्कूल पिछले नौ माह से बंद हैं। खासकर छोटे स्कूल संचालक भी स्कूल बंद रहने से परेशानी का सामना कर रहे हैं। यू डायस के अनुसार, जिले के 100 सौ से अधिक निजी स्कूलों में साढे चार हजार शिक्षक काम कर थे। अब इनमें से अधिकांश का रोजगार स्कूल बंद रहने से छीन गया है। शिक्षण संस्थानों के बंद होने से भुखमरी के कगार पर खड़े प्राइवेट शिक्षक खेती व अन्य विकल्प में नया रोजगार तलाश रहे है।
हालांकि अधिकांश निजी स्कूल बच्चों से ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर पूरी फी की वसूली कर रहे हैं लेकिन स्कूल बंद रहने की स्थिति में पिछले नौ माह से निजी स्कूलों के शिक्षकों को वेतन भी नहीं मिल सका है। अधिकांश बच्चों के अभिभावक पढ़ाई नहीं होने के बावजूद स्कूलों के दवाब में फीस भरते जा रहे हैं। अब अचानक बदले हालात के कारण भूखमरी की कगार पर खड़े ऐसे शिक्षक रोजगार के विकल्प तलाश रहे हैं। कई शिक्षकों ने तो खेती को ही स्वरोजगार बना काम शुरू कर दिया है।
जबकि भूमिहीन व गरीब तबके के निजी स्कूलों के शिक्षक छोटा मोटा दुकान चलाकर अपनी आजीविका के साधन का जुगाड़ कर रहे हैं। कोरोना के चलते मार्च माह से ही निजी स्कूल पूरी तरह से बंद चल रहे हैं। सरकारी शिक्षकों को तो सरकार पूरा वेतन दे रही है जबकि प्राइवेट स्कूल संचालक की कमाई बच्चों की फीस ही निर्भर है।
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