सूबे में बाढ़ पीड़ितों की संख्या में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है। महज एक पखवारे में ही बाढ़ पीड़ितों की संख्या सात गुनी से अधिक हो गयी है। मात्र 15 दिन पहले बिहार में बाढ़ पीड़ितों की संख्या 10 लाख थी, जो आज बढ़कर 70 लाख से अधिक हो चुकी है। बाढ़ के कारण 21 लोगों की मृत्यु भी हो चुकी है। इस समय बिहार के 16 जिलों में बाढ़ की स्थिति है, जो लगातार गंभीर ही होती जा रही है।
124 प्रखंड के 1185 पंचायतों में बाढ़ के कारण लोग परेशान हैं। अबतक 4.81 लाख फंसे लोगों को निकाला गया है और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार इस समय सूबे में 1402 सामुदायिक किचेन चल रहे हैं और उसमें दस लाख से अधिक लोग रोजाना भोजन कर रहे हैं। बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 8 राहत शिविर लगाए गए हैं।
ये जिले हैं बाढ़ से प्रभावित
सीतामढ़ी, शिवहर, सुपौल, किशनगंज, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, पूर्वी और पश्चिमी चंपारण, खगड़िया, सारण, समस्तीपुर, सीवान।
गोपालगंज: पकहां में नदी की धारा रोकने के लिए कटाव स्थल पर निर्माण शुरू
बाढ़ की तबाही रोकने के लिए पकहां और चिउटाहां में कटाव स्थल पर रिंग बांध बनाने का काम शुरू हो गया है। एक सप्ताह में दोनों जगहों पर बांध बनकर तैयार हो जाएगा। हालांकि कटाव स्थल पर अभी पानी का बहाव काफी तेज है। इससे बांध मरम्मत कर रही एजेंसी को कई तरह की मुश्किलों को सामना करना पड़ रहा है। पानी के तेज बहाव से अभी 200 गांवों में बाढ़ की तबाही कम नहीं हो रही है। जलस्तर की बात करें तो 5 दिनों में ढ़ाई फूट पानी कम जरूरी हुआ है, लेकिन लो लैंड एरिया के इन गांवों में अभी भी 3 से 4 फूट पानी बह रहा है। राहत की बात यह है कि नेपाल बराज से भी पिछले 8 दिनों में पानी का डिस्चार्ज काफी गिर गया है। शुक्रवार को बाल्मीकि नगर डैम से 1 लाख 73 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
सीतामढ़ी: नदियों के जलस्तर कम हुआ, फिर भी नहीं लौटे घर, घराें में मलबा जमा
बागमती, अधवारा व मरहा नदी के जलस्तर में लगातार गिरावट हो रही है। बाढ़ का पानी गांव से निकल चुका है लेकिन, बेघर परिवार के घरों से निकल रहे सड़ांध व मलबा के कारण अब सौ से अधिक परिवार ऊंचे जगहों पर सिरकी (पॉलिथीन) तान कर बाल-बच्चों के साथ रहने को विवश है। घरों से बाढ़ का पानी तो निकल चुका है, लेकिन क्षतिग्रस्त घरों से निकल रहे सड़ांध और विषैले जीवों के डर से लोग घरोनहीं लौट रहे हैं। बैरगनिया प्रखंड के चकवा, तकिया टोल व पिपराही गांव के बाढ़ से प्रभावित करीब 70 परिवार के 500 की आबादी अब भी बांध पर ही शरण लिए हुए हैं। बागमती नदी के किनारे बसे इन परिवारों के घरों से बाढ़ का पानी तो निकल चुका है लेकिन, घरों में गंदगी जमा है।
मुजफ्फरपुर: बाढ़ पीड़िताें ने कार्यालय में घुस बीडीओ व सीओ पर किया हमला
बंदरा प्रखंड कार्यालय में घुस कर बाढ़ पीड़ितों ने बीडीओ, सीओ पर हमला कर दिया। प्रखंड कार्यालय पर बीडीओ कार्यालय में प्लास्टिक वितरण को लेकर जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक हाे रही थी। इसी बीच पिपड़रपतिया निवासी कृष्ण देव राय और लोहरखा निवासी राकेश कुमार के नेतृत्व में 100 अधिक बाढ़ पीड़ित लोगों ने कार्यालय में घुस कर बीडीओ और सीओ पर जाति सूचक व घटिया गाली-गलौज देते हुए हमला बोल दिया, जिसमें बीडीओ के चालक मो. जावेद और मुखिया पति अनिल गुप्ता जख्मी हाे गए। सीओ और बीडीओ ने छिप कर जान बचाई। हत्था पंचायत गांव के प्रफुल्ल कुमार को फाेटाे लेने के आरोप में बाढ़ पीड़ितों ने पिटाई कर दी। बीडीओ अलख निरंजन और सीओ रमेश कुमार ने पियर थाना को इसकी जानकारी दी।
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