जिले में काेराना की बढ़ती रफ्तार के कारण अभी ज्यादा से ज्यादा सैंपलिंग की जरूरत है, लेकिन किट की कमी के कारण मेडिकल काॅलेज में खुले नए लैब में क्षमता के अनुसार जांच नहीं हाे पा रही है। पिछले दिनाें सैंपलिंग की संख्या बढ़ने के बावजूद भागलपुर कटिहार और पूर्णिया से भी पीछे है। कटिहार में अब तक 36 हजार और पूर्णिया में 30 हजार से अधिक लाेगाें की काेराेना जांच हाे चुकी है। लेकिन शुक्रवार तक भागलपुर में केवल 29,212 लाेगाें की ही जांच हुई है। मेडिकल काॅलेज में एक सप्ताह पहले खुले लैब में आरटीपीसीआर मशीन लगाई गई है, लेकिन किट की कमी के कारण केवल ट्रायल ही चल रहा है। राेज केवल 50 सैंपल की जांच हाे रही है। अगर किट मिल जाए ताे यहां राेज 300 सैंपल की जांच हाेने लगेगी। एंटीजन किट से निगेटिव रिपाेर्ट आने और ट्रू नेट से पाॅजिटिव आने से सीबीनेट या आरटीपीसीआर मशीन से दुबारा जांच करनी पड़ती है। लेकिन लैब व मशीन रहने के बावजूद सैंपल काे पटना भेजना पड़ रहा है। वहां से रिपाेर्ट आने में 36 घंटे तक लग रहे हैं। जब तक मरीज संशय में रहते हैं। संक्रमण की चेन बढ़ने का भी खतरा रहता है।
अब तक 1000 किट मिले चार माह का मांगा है काेटा
मेडिकल काॅलेज अस्पताल के प्रिंसिपल डाॅ. हेमंत कुमार सिन्हा ने बताया कि नए लैब में 300 सैंपल की जांच की क्षमता है, लेकिन किट की कमी के कारण 50 सैंपल की ही जांच हाे पा रही है। एक हजार किट ही आरटीपीसीआर मशीन के लिए मिले हैं। हमने चार महीने के लिए किट की मांग की है ताकि सामान्य जांच के अलावा एंटिजन व ट्रू नेट मशीन की जांच के बाद आए सैंपल काे भी कन्फर्म किया जा सके। यह जांच यहां संभव है लेकिन हमें सैंपल काे पटना भेजना पड़ रहा है। सिर्फ ट्रायल के ताैर पर यहां आरटीपीसीआर मशीन से जांच कर रहे हैं।
जानिये किस तरह की जांच से कैसे मिलती है रिपाेर्ट
एंटीजन किट : इस किट से आधे घंटे के अंदर जांच रिपाेर्ट मिल जाती है। लेकिन इसमें पाॅजिटिव काे कंर्फम माना जाता है पर निगेटिव हाेने पर दुबारा आरटीपीसीआर या सीबीनेट मशीन से जांच जरूरी है।
ट्रू नेट : इस मशीन से जांच कराने पर निगेटिव रिपाेर्ट काे कंर्फम माना जाता है। पाॅजिटिव आने पर आरटीपीसीआर या सीबीनेट मशीन से जांच कराना जरूरी है।
सीबीनेट : इस मशीन से 45 मिनट में चार सैंपलाें की जांच की जाती है। इससे पाॅजिटिव या निगेटिव दाेनाें काे कंर्फम माना जाता है। मायागंज में चल रहे लैब में यह मशीन लगी है। पर क्षमता कम है।
आरटीपीसीआर : यह मशीन नए लैब में लगी है। इसमें एक बार में 94 सैंपलाें की जांच की जा सकती है। इसमें पाॅजिटिव या निगेटिव दाेनाें काे कंर्फम माना जाता है।
दाे दिन में पटना भेजे गए हैं 506 सैंपल
दाे दिन में 506 सैंपल आरटीपीसीआर मशीन से जांच करने के लिए पटना भेजे गए हैं। वहां से रिपाेर्ट आने में 24 घंटे से 36 घंटे तक लग रहे हैं। किट की कमी के कारण यह जांच यहां नहीं हाे पा रही है। -डाॅ. विजय कुमार सिंह, सिविल सर्जन
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