पटना के दानापुर का 35 साल पुराना सेंट स्टीफंस स्कूल बंद हो गया। स्कूल की 10 बसों में दो बिक गई हैं, 8 बसों के लिए ग्राहक तक नहीं मिल रहे हैं। कर्ज में डूबे स्कूल के प्रबंधक ने चांदमारी रोड स्थित अपने दूसरे स्कूल पैटमार (Patmar) को भी बंद करने का फैसला कर लिया है। हर माह 25 लाख का कर्ज चढ़ रहा है और ढाई लाख भी नहीं आ रहा है। कर्ज में डूबे बिहार के 20 हजार स्कूलों को उनके प्रबंधकों ने बंद करने का फैसला किया है। इसमें 95 प्रतिशत स्कूल किराए के भवन में चल रहे हैं जहां मिडिल और लोअर मिडिल क्लास परिवार के बच्चों की पढ़ाई चल रही थी। स्कूल संचालक स्कूल बंद करने को मजबूर हैं। इनमें पटना के 25 सौ स्कूल शामिल हैं। ऐसा हुआ तो बिहार के 50 लाख बच्चों के भविष्य में शिक्षा का संकट गहराएगा।
स्कूल बंद होने का बड़ा कारण
बंद हो रहे स्कूलों का कारण जानने के लिए जब 'दैनिक भास्कर' ने पड़ताल की तो पता चला कि आने वाले समय में सबसे बड़ी मार मिडिल और लोअर मिडिल परिवारों पर पड़ने वाली है। बड़े स्कूल तो टीचर और स्टाफ को 50 प्रतिशत कटौती कर सैलरी दे रहे हैं लेकिन छोटे स्कूल जो किराए के मकान में चल रहे हैं वह कर्ज में डूबते जा रहे हैं। प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद शमायल अहमद का कहना है कि सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो जनवरी 2021 तक 20 हजार स्कूलों में ताला लग जाएगा, जिससे 50 लाख बच्चों की शिक्षा संकट गहरा जाएगा। बिशप स्कॉट स्कूल के शैलेश का कहना है कि 50 लाख महीने का खर्च है, 9 माह में 18 से 20 करोड़ का कर्ज हो गया है। फीस 15 प्रतिशत ही आ रही है वह भी सिर्फ ट्यूशन की। ऐसे में अब भविष्य पर संकट दिख रहा है।
संकट में स्कूल, बेच रहे बस
सैयद शमायल अहमद का कहना है कि बेतिया के सेंट कोलंबस, कटिहार के न्यू पैटंर्स, छपरा के सेंट्रल पब्लिक स्कूल, हाजीपुर के शिक्षा निकेतन, पटना के बेली रोड के होली विजन, पटना के कंकड़बाग के सेंट मेरी और पटना के ही पॉयनियर हाई स्कूल की स्थिति काफी खराब है। कर्ज में डूबे इन स्कूलों के संचालक मकान का किराया नहीं दे पा रहे हैं। अब स्कूल बस बेचने की तैयारी है। अगर मदद नहीं मिली तो ये स्कूल जनवरी में बंद हो जाएंगे।
ऑनलाइन का बड़ा प्रोजेक्ट, 90 प्रतिशत स्कूलों को फीस नहीं
प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद शमायल अहमद का कहना है कि उनके पास 38 जिलों के 25 हजार से अधिक निजी स्कूलों का फीडबैक है। 25 हजार स्कूलों से बातचीत में यह बात सामने आई है कि 90 प्रतिशत स्कूलों को ऑनलाइन क्लास के बाद भी फीस नहीं मिल रही है। पांच प्रतिशत स्कूलों में 10 प्रतिशत ही फीस आ रही है। वहीं 5 प्रतिशत स्कूलों में 20 से 50 प्रतिशत फीस ही आ रही है। 7 हजार स्कूल गाड़ियों को बेचने की तैयारी में हैं। एक सामान्य स्कूल का एक माह का बिजली बिल कम से कम 25 सौ रुपए आ रहा है। सैयद शमायल अहमद का कहना है स्कूलों का जो फीडबैक आया है उसके मुताबिक शुरुआती दो माह तो समस्या नहीं हुई, लेकिन अब नौ माह से कर्ज पर कर्ज बढ़ता जा रहा है। विकट स्थिति में स्कूल चल रहे हैं और जनवरी में स्कूलों में ताला लग जाएगा।
भास्कर की पड़ताल में 5 बड़े कारण
दैनिक भास्कर की पड़ताल में स्कूलों के बंद होने के 5 बड़े कारण सामने आए। यह बड़े कारण हैं जिसका समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में स्कूल संचालकों का आक्रोश सड़क पर फूटेगा।
- कारण एक : बिजली का बिल
स्कूलों में कमर्शियल कनेक्शन होते हैं। एक सामान्य स्कूल का बिजली बिल बिना उपयोग के भी हर माह 25 सौ रुपए आ रहा है। बिशप स्कॉट स्कूल की 3 शाखाएं हैं। एक स्कूल का बिल हर माह 90 हजार के आसपास आता है। स्कूलों पर यह बड़ी मार है।
- कारण दो : बस की किस्त
एक सामान्य स्कूल में भी कम से कम पांच स्कूल वाहन होते हैं। इन बसों को चार से पांच साल की ईएमआई पर लिया जाता है। नौ माह से स्कूल बंद होने के कारण स्कूल के पास बसों की किस्त जमा करने का पैसा नहीं है। ऐसे में बस या तो बिक जाएगी या फिर फाइनेंस कंपनी उसे अपने कब्जे में ले लेगी।
- कारण तीन : मकान का रेंट
स्कूलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती मकान का किराया है। सामान्य स्कूल भी हर माह 50 हजार से कम इस मद में खर्च नहीं करता है। स्कूल संचालकों का कहना है सामान्य परिस्थिति में भी कम से कम 10 से 12 कमरे का भवन चाहिए होता है। नौ माह से कई स्कूलों का मकान का रेंट बकाया है।
- कारण चार : स्टाफ की सैलरी
स्कूलों के लिए स्टाफ को सैलरी देना भी बड़ी चुनौती है। पटना के दानापुर सेंट स्टीफंस स्कूल के मेरव्यान कोयले का कहना है कि वह स्कूल की बस बेचने के बाद जो पैसा आया उसे स्टाफ को दे दिया गया। इसके बाद भी वह कर्ज से नहीं उबर पाए। बिहार के सभी स्कूलों के साथ टीचर और स्टाफ को सैलरी देने के लिए पैसा नहीं है।
- कारण पांच : सरकार के टैक्स का बोझ
स्कूलों की बसों पर रोड टैक्स के रूप में बड़ा बकाया है। सरकार ने आदेश दिया था कि बसें सड़क पर नहीं खड़ी होंगी, इसके लिए स्कूलों ने किराए पर जगह लिया। अब रोड टैक्स का बकाया बड़ी समस्या है। प्रशासन ने आदेश दिया है कि दिसंबर में टैक्स नहीं जमा करने वालों से सख्ती की जाएगी। ऐसे में स्कूलों के पास बस बेचने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3qBKxrw

0 Comments
Please do not enter any spam link in the comment box