कोरोना संक्रमण, डेंगू-डायरिया जैसे रोगों के प्रसार ने हर माता-पिता की चिंता बढ़ा दी है। नवजातों में रोग प्रतिरोधक क्षमता धीरे-धीरे विकसित होती है। इसलिए माता को उनके स्वास्थ्य के प्रति हमेशा सजग रहना पड़ता है। त्यौहारों का सिलसिला शुरू होने वाला है।
इस दौरान ख़रीदारी, घर की साफ-सफाई, मेहमानों का स्वागत जैसे अतिरिक्त कामों से माताओं की व्यस्तता बढ़ जाने से शिशुओं का स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। इसलिए दूसरी जिम्मेदारियाँ निभाते हूए बच्चे के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी नजरअंदाज़ न करें।
अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ मीना कुमारी ने बताया माँ का दूध नवजात के लिए अमृत समान है। क्योंकि माँ के दूध में एंटीबॉडी होते हैं। जो बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। उन्होंने बताया जन्म के 1 घन्टे के भीतर शिशुओं को स्तनपान कराने से नवजात शिशु मृत्यु दर में 20% की कमी लायी जा सकती है।
6 माह तक सिर्फ स्तनपान करने वाले शिशुओं में डायरिया से 11% एवं निमोनिया से 15% तक कम मृत्यु की संभावना होती है। माताओं को यह ध्यान देना आवश्यक है कि स्तनपान कराने से पहले अपने व्यक्तिगत और आस-पास की साफ सफाई का ध्यान रखें। स्तनपान कराने से पहले और बाद में या किसी भी तरह के गंदे और धूल जमे वस्तु को छूने के बाद हाथों को पानी एवं साबुन से 40 सेकंड तक धोएं। अल्कोहल बेस्ड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।
एसीएमओ ने बताया कोरोना उपचारधीन माताएँ भी सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए शिशु को स्तनपान करा सकती हैं। स्तनपान कराने वाली माताएँ बेहद जरूरी होने पर हीं घर से बाहर निकलें। बाहर निकलने पर मास्क और सैनिटाइजर का उपयोग करें। शारीरिक दूरी का पालन करें। नवजात को घर से बाहर या भीड़ भाड़ से दूर रखें। मास्क का प्रयोग उनके लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
शिशु के स्वभाव में बदलाव दिखे तो हो जाएँ सचेत
डॉ मीना कुमारी ने बताया कोरोना संक्रमण और मौसमी बदलाव को देखते हुये नवजात के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। यदि बच्चे में अस्वस्थता, बुखार, पेट दर्द, नींद नहीं आना, बिना कारण रोते रहना या चिड़चिड़ापन जैसे कोई भी लक्षण दिखे तो घरेलू इलाज में समय बर्बाद नहीं करते हुए अविलम्ब आशा कार्यकर्ता, नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र, एएनएम या चिकित्सक से संपर्क करें।
उन्होंने बताया सामान्य तौर पर शिशु के सम्पूर्ण मानसिक और शारीरिक विकास के लिए दिन भर में 8 से 10 बार स्तनपान कराने और माँ के साथ और देखभाल की जरूरत होती है। इसके अभाव में उसके स्वभाव में बदलाव आ सकते हैं। इसलिए उसके स्वास्थ्य पर भी नजर रखें।
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