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राेज तीन बार हाेनी चाहिए पानी की जांच, निगम एक बार भी नहीं कर रहा, न लैब बनाया, न केमिकल इंजीनियर रखे https://ift.tt/3iSimiV

नगर निगम बरारी वाटर वर्क्स से बिना उचित जांच-पड़ताल के शहर की एक लाख आबादी काे राेज पानी पिला रहा है। नियम है कि वाटर वर्क्स के निजी लैब में राेज तीन बार पानी की जांच हाे, उसके बाद ही उसे सप्लाई किया जाए। निजी एजेंसी पैन इंडिया ऐसा करती थी, लेकिन उससे काम छिनने के बाद डेढ़ साल में निगम न ताे अपना लैब बना पाया है और न ही जांच के लिए केमिकल इंजीनियर हैं।

15 दिन पर पीएचईउी के लैब से जांच कराकर केवल खानापूर्ति की जा रही है। हर तीन माह पर एनएबीएल लैब से भी पानी की जांच हाेनी चाहिए, लेकिन डेढ़ साल से यह जांच नहीं हुई है। वाटर वर्क्स के तालाब में गंगा का मटमैला पानी आता है उसी में केवल जरूरी केमिकल मिलाकर सप्लाई किया जा रहा है।

जांच नहीं हाेने के कारण कहीं पानी से दुर्गंध आ रहा है ताे कहीं इसके इस्तेमाल से लाेगाें काे खुजली हाे रही है। पानी में कितना क्लाेरीन, चूना, फिटकिरी और ब्लीचिंग पाउडर मिलाना है। इसके लिए इंजीनियर नहीं है। मजदूर अंदाज से ही फिटकिरी व ब्लीचिंग पाउडर मिलाकर काम चला रहे हैं।

मटमैला पानी पीने याेग्य नहीं नहाने से खुजली, दुर्गंध आ रही
बरारी वाटर वर्क्स से करीब एक लाख लाेगाें काे पानी मिलता है। इसके अलावा 58 बाेरिंग से भी माेहल्लाें में पानी की सप्लाई हाेती है। 100 से ज्यादा प्याऊ से भी लाेग पानी ले जाते हैं। बाेरिंग व प्याऊ से ताे ग्राउंड वाटर दिया जाता है। लेकिन वाटर वर्क्स से गंगा का पानी सप्लाई हाेता है।

वार्ड 22 में बैंक काॅलाेनी में गंगा किनारे हथिया नाले के पास जनता नल से सुबह में गंदा पानी आता है। पानी के साथ मिट्टी भी आती है और इससे दुर्गंध आता है। लाेगाें की शिकायत है कि बिना उबाले यह इस्तेमाल करने लायक नहीं है। वार्ड 21 के लाेगाें ने बताया कि पानी से नहाने से खुजली हाेने लगती है।
पहले ये थी व्यवस्था: पैन इंडिया 24 घंटे में तीन बार अपने लैब में पानी की जांच करती थी। हर 15 दिन में पीएचईडी से इसकी जांच करायी जाती थी। तीन महीने पर एनएबीएल के रजिस्टर्ड लैब में जांच होती थी।

अभी ये हैं हालात: निगम ने वाटर वर्क्स में लैब नहीं बनाया है। पीएचईडी से भी कभी-कभार ही जांच कराई जाती है। एनएबीएल लैब काे डेढ़ साल में एक बार भी पानी का सैंपल नहीं भेजा गया है।

पानी में उचित मात्रा में केमिकल मिलाना जरूरी
एक लीटर पानी में .2 मिलीग्राम क्लाेरीन मिलाना चाहिए। यह सही मात्रा में मिलाया जाए, इसके लिए केमिकल इंजीनियर का रहना जरूरी है। क्लाेरीन मिलाने के बाद फिर उसकी गुणवत्ता परखी जाती है। -राजीव रंजन मिश्रा, केमिकल इंजीनियर

चूना व ब्लीचिंग की ज्यादा मात्रा से हाेता है एलर्जी
पानी में चूना और ब्लीचिंग की मात्रा ज्यादा रहेगी और उसका इस्तेमाल हाेगा ताे एलर्जी हाे सकती है। इससे चर्मराेग हाेने की संभावना रहती है। -डाॅ. राजीव रंजन, चर्म राेग विशेषज्ञ
एजेंसी करेगी काम, इसलिए नहीं बनवा रहे अपना लैब
पानी की पीएचईडी से जांच करवाते हैं। एनएबीएल लैब से पानी की जांच नहीं हुई है। निगम के पास अपना लैब नहीं है। भविष्य में एजेंसी काे ही यह काम करना है। इसलिए निगम अपना लैब नहीं बना रहा है।
सत्येंद्र प्रसाद वर्मा, पीआरओ, निगम



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Rage should be tested thrice, the corporation is not even doing it once, nor did it create a lab, nor hire a chemical engineer


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