नगर निगम में मेयर-डिप्टी मेयर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की सियासत ठंडी भी नहीं पड़ी कि जिला परिषद अध्यक्ष अनंत कुमार उर्फ टुनटुन साह के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू हाे गई। जिप अध्यक्ष के खिलाफ सालभर में यह दूसरी बार प्रस्ताव लाने की तैयारी है।
इससे पहले 15 जनवरी 2019 काे प्रस्ताव लाया गया था। तब 31 में केवल 11 जिला परिषद सदस्य की उपस्थिति से प्रस्ताव गिर गया था और टुनटुन साह की कुर्सी बच गई थी। इस बार 31 सदस्यों वाली सदन में नियमानुसार 7 सदस्याें अविश्वास जताया है। उन्होंने डीएम, डीडीसी व जिला परिषद काे पत्र दिया है। उन्होंने प्रस्ताव पर चर्चा के लिए बैठक बुलाने की बात कही है।
टुनटुन पर आराेप-उनके कार्यकाल में भ्रष्टाचार
पत्र में कहा है कि जून 2016 से टुनटुन साह जिला परिषद अध्यक्ष हैं। तब से अब तक परिषद की सभी याेजनाओं के क्रियान्यवन में अध्यक्ष विफल हुए हैं। काेराेना जैसी महामारी में भी वे अक्षम रहे और इससे सदस्याें काे क्षेत्र में लाेगाें के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। वे शर्मसार हो रहे हैं। एक भी सामग्री, मसलन मास्क, सैनिटाइजर लाेगाें काे नहीं दिया जा सका।
जिला परिषद अध्यक्ष के कार्यकाल में भ्रष्टाचार का बाेलबाला है। जिला परिषद की दुकानाें के निर्माण के नाम पर भ्रष्टाचार हो रहा है। इसलिए सप्ताहभर में इस पर चर्चा के लिए एक विशेष बैठक बुलाई जाए। इसकी काॅपी डीएम, जिला परिषद के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी सह डीडीसी काे भी दी गई है। पत्र में जिला परिषद सदस्य वीरबल कुमार, शिव कुमार, प्रीति कुमारी, विपिन कुमार मंडल, साेनी कुमारी, माला देवी और प्रेमलता देवी का हस्ताक्षर है।
अचानक अविश्वास के पीछे की कहानी
जिला परिषद अध्यक्ष टुनटुन साह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की पीछे की कहानी नगर निगम से जुड़ी है। निगम में मेयर सीमा साहा जिला परिषद अध्यक्ष की पत्नी हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान बने राजनीतिक समीकरण के कारण निगम में अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। वही असर जिला परिषद में दिख रहा है। टुनटुन विधानसभा चुनाव में टिकट के लिए भाजपा से निराश हाेकर राजद की ओर मुड़ गए थे।
राजद ने भी टिकट नहीं दिया। हालांकि तब कयास लगाए जा रहे थे कि सुल्तानगंज की सीट कांग्रेस के खाते में नहीं जाती ताे राजद से टुनटुन साह काे टिकट मिल सकता है। तब से राजद के कुछ नेता टुनटुन से नाराज थे। अब अपनी ताकत दिखाने को राजद नेता पर्दे के पीछे से अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं। दूसरी तरफ भाजपा के कई नेता और कार्यकर्ता भी उनसे अंदरूनी रूप से नाराज चल रहे हैं।
जनवरी 2019 काे अविश्वास प्रस्ताव गिर गया था
जिप अध्यक्ष के खिलाफ पहली बार 15 जनवरी 2019 काे अविश्वास प्रस्ताव आया था। तब प्रस्ताव पर काफी हंगामा हुआ था। अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए हुई बैठक में केवल 11 सदस्य ही उपस्थित हुए थे, इससे टुनटुन की कुर्सी बच गई थी। उस समय टुनटुन पर 20 पार्षदाें काे गुमनाम स्थान पर रखने का आराेप लगा था। प्रस्ताव गिरने के बाद जिला परिषद कार्यालय में काफी हंगामा हुआ था। ताेड़-फाेड़ भी हुई थी।
अब आगे क्या
जिप अध्यक्ष टुनटुन साह ने 22 जून 2016 काे शपथ ली थी। उनका कार्यकाल 21 जून 2021 काे पूरा हाेगा। नियमानुसार, कार्यकाल खत्म हाेने के 6 माह पहले तक ही अविश्वास प्रस्ताव आ सकता है। अब 6 माह 16 दिन ही बाकी हैं। अगर 16 दिन बीत गए ताे प्रस्ताव में अड़चन आ सकती है। इस दिशा में टुनटुन साह आगे बढ़ सकते हैं। विराेधी जल्द बैठक को दबाव बना सकते हैं।
पत्र की मुझे जानकारी नहीं
मुझे जानकारी नहीं है। साेमवार काे देखेंगे कि पत्र में क्या है। फिर जवाब देंगे। - अनंत कुमार, अध्यक्ष, जिला परिषद
अभी इस बारे में नहीं बता पाएंगे
अभी जानकारी नहीं है। मैं डीएम के साथ सुल्तानगंज गया था। पत्र देखने के बाद कुछ बता पाएंगे। - सुनील कुमार, डीडीसी
मेयर और डिप्टी मेयर बोले- बैठक में साबित करेंगे अपना बहुमत
मेयर-डिप्टी मेयर के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव पर 9 दिसंबर को दोपहर 1 बजे बैठक होगी। इसमें मेयर सीमा साहा और डिप्टी मेयर राजेश वर्मा बहुमत साबित करेंगे। बहुमत साबित करने की तारीख तय होने के साथ ही पार्षदों से समर्थन जुटाने और मान-मनौव्वल का काम भी तेज हाे गया।
दिनभर मेयर-डिप्टी मेयर बहुमत के लिए पार्षदों के संपर्क में रहे। मेयर के भीखनपुर स्थित घर पर डिप्टी मेयर, वार्ड-4 के पार्षद प्रतिनिधि पप्पू यादव ने बहुमत की रणनीति बनाई। मेयर ने दक्षिणी क्षेत्र के कुछ पार्षदाें से मिलकर समर्थन भी मांगा। भाजपा से जुड़े एक पार्षद प्रतिनिधि से भी समर्थन मांगा।
विरोधी पार्षदों को झारखंड और पटना में रखा गया है
विराेधी पार्षद झारखंड के देवघर और पटना में हैं। देवघर के हाेटल में ठहरे पार्षदों की आवभगत तिलकामांझी के एक पार्षद की देखरेख में चल रही है। उनके फोन भी रिसेप्शन पर रख लिए गए हैं। इसके एवज में उन्हें नए मोबाइल व नया सिम कार्ड भी दिया गया है।
सत्ता पक्ष के समर्थक शिफ्ट हुए बंगाल
सत्ता पक्ष के भी आधा दर्जन से ज्यादा पार्षदाें काे सिलीगुड़ी से 30 किलाेमीटर पहले एक रिसाॅर्ट में रखा गया है। कोई चूक न हो, इसलिए पार्षदाें व समर्थकाें के माेबाइल रख लिए गए हैं।
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